25 अप्रैल से कार्य शुरू कर सकते हैं निर्यात उन्मुख उद्योग : मुख्यमंत्री के संवेदनशील महत्वपूर्ण निर्णय

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  • जिन उद्योगों के पास निर्यात के ऑर्डर हों और जो म्युनिसिपल सीमा के भीतर लेकिन कंटेनमेंट क्षेत्र से बाहर कार्यरत हों, ऐसे उद्योगों को जिला कलक्टर से उद्योग शुरू करने की अनुमति लेनी होगी
  • सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना संक्रमण नियंत्रण के दिशानिर्देशों के पालन की शर्तों के साथ दी जाएगी मंजूरी
  • राज्य में 35 हजार औद्योगिक इकाइयां कार्यरत, 3.25 लाख कामगारों को रोजी-रोटी मुहैया हुई
  • लॉकडाउन की स्थिति में रोज कमाने-खाने वाले स्वरोजगारकार प्लंबर, कारपेंटर, ऑटो मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन को कामकाज शुरू करने देने जिला कलक्टरों को निर्देश
  • राज्य के 66 लाख एनएफएसए कार्ड धारक परिवारों के 3.25 करोड़ लोगों को 25 अप्रैल से प्रति व्यक्ति 3.50 किलो गेहूं व 1.50 किलो चावल मुफ्त वितरित किया जाएगा
  • 34 लाख एनएफएसए कार्ड धारक लाभार्थियों के बैंक खाते में अब तक 340 करोड़ की आर्थिक सहायता जमा कराई
  • सार्वजनिक उपक्रम और उद्योग सीएसआर के तहत जीएसडीएमए को दे सकते हैं योगदान

मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी ने कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति में घोषित लॉकडाउन के दौरान राज्य की निर्यात उन्मुख औद्योगिक इकाइयों को आर्थिक सहारा देने वाला महत्वपूर्ण निर्णय किया है।
इस संदर्भ में उन्होंने ऐसे दिशानिर्देश दिए हैं कि राज्य में जो औद्योगिक इकाइयां निर्यात करती हैं और जिनके पास अभी निर्यात के ऑर्डर हैं, ऐसी सभी इकाइयां आगामी शनिवार, 25 अप्रैल से शुरू की जा सकेंगी।
मुख्यमंत्री के सचिव ने गुरुवार को गांधीनगर में इस निर्णय की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि निर्यात करने वाली ऐसी औद्योगिक इकाइयां जिनके पास निर्यात के ऑर्डर लंबित हैं और ऐसे उद्योग म्युनिसिपल की सीमा में हों लेकिन कंटेनमेंट क्षेत्र के बाहर कार्यरत हों, उन्हें भी इकाइयां पुनः शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार इस उद्देश्य के तहत ऐसी औद्योगिक इकाइयों को संबंधित जिला कलक्टर को आवेदन कर अनुमति प्राप्त करनी होगी तथा सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी बनाए रखने सहित कोरोना संक्रमण के नियंत्रण की सुरक्षा संबंधित गाइडलाइन का सख्ती से पालन करना होगा।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के अंतर्गत हर महीने सरकारी मान्यता प्राप्त उचित मूल्य की दुकानों से खाद्यान्न प्राप्त करने के पात्र राज्य के अंत्योदय, गरीब वर्ग के 66 लाख परिवारों के लिए और एक संवेदनशील निर्णय किया है।
श्री विजय रूपाणी ने निर्णय किया है कि ऐसे 66 लाख कार्ड धारक परिवारों के 3.25 करोड़ लोगों को आगामी शनिवार, 25 अप्रैल से प्रति व्यक्ति 3.50 किलो गेहूं और 1.50 किलो चावल राज्य सरकार की ओर से निःशुल्क वितरित किए जाएगा।
मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील निर्णय के संबंध में मुख्यमंत्री के सचिव ने कहा कि ऐसे कार्ड धारकों को 17 हजार से अधिक उचित मूल्य की दुकानों से यह अनाज वितरण 25 से 28 अप्रैल के दौरान किया जाएगा।
तदनुसार, जिन एनएफएसए कार्ड धारकों के राशन कार्ड नंबर का आखिरी अंक 1 और 2 है ऐसे कार्ड धारकों को शनिवार, 25 अप्रैल को, 3 और 4 आखिरी अंक वाले कार्ड धारकों को रविवार, 26 अप्रैल, 5 और 6 आखिरी अंक वाले कार्ड धारकों को सोमवार, 27 अप्रैल, 7 और 8 आखिरी अंक वाले कार्ड धारकों को मंगलवार, 28 अप्रैल तथा जिनके राशन कार्ड नंबर का आखिरी अंक 9 और 0 है ऐसे एनएफएसए कार्ड धारकों को बुधवार, 29 अप्रैल को राशन वितरित किया जाएगा। 
अनाज वितरण के दौरान भीड़भाड़ से बचने तथा सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की पालना संबंधित एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार यदि इन निर्धारित दिनों के दौरान कोई भी एनएफएसए कार्ड धारक परिवार अपरिहार्य कारणों से अनाज वितरण का लाभ नहीं ले पाता है तो ऐसे लाभार्थी गुरुवार, 30 अप्रैल को अपना अनाज प्राप्त कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री के एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के अनुसार राष्ट्रीय आपदा घोषित कोविड-19 रोग के नियंत्रण के लिए सार्वजनिक उपक्रमों, उद्योगों और दाताओं की ओर से कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के रूप में दिया जाने वाला योगदान राज्य सरकार का गुजरात राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (जीएसडीएमए) भी स्वीकार करेगा।
इस संदर्भ में मुख्यमंत्री के सचिव ने कहा कि जीएसडीएमए में दिया जाने वाला ऐसा योगदान सार्वजनिक उपक्रमों, औद्योगिक इकाइयों का सीएसआर खर्च माना जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी ने लॉकडाउन की मौजूदा स्थिति में छोटे-मोटे स्वरोजगार के जरिए रोजगार प्राप्त करने वाले और जीवन आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय किया है।
इस निर्णय की जानकारी देते हुए श्री अश्विनी कुमार ने कहा कि स्वरोजगार से जुड़े प्लंबर, कारपेंटर, इलेक्ट्रिशियन और मोटर-ऑटो मैकेनिक को उनका कामकाज शुरू करने देने जिला कलक्टरों को निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के सचिव ने कहा कि राज्य में नगरों और महानगरों की सीमा के बाहर ग्रामीण क्षेत्रों में 20 अप्रैल से औद्योगिक इकाइयों को केंद्र सरकार के नियमों के अधीन पुनः शुरू करने की अनुमति के अंतर्गत गुजरात में 35 हजार इकाइयां कार्यरत हुई हैं। यही नहीं, 3 लाख 25 हजार श्रमिक-कामगारों को रोजी-रोटी मिलने लगी है।
उन्होंने कहा कि राज्य के 66 लाख एनएफएसए कार्ड धारकों को मौजूदा विकट स्थिति में आर्थिक सहायता देने के लिए 1000 रुपए उनके बैंक खाते में जमा कराने की मुख्यमंत्री की प्रेरणा से 20 अप्रैल से शुरुआत हुई है।
इस संदर्भ में श्री अश्विनी कुमार ने कहा कि आज गुरुवार को राज्य के 8 महानगरों के ऐसे 11.38 लाख एनएफएसए लाभार्थियों के बैंक खाते में 113 करोड़ रुपए की राशि जमा हुई है।
उन्होंने कहा कि अब तक 340 करोड़ रुपए की राशि 34 लाख एनएफएसए लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा हुई है।

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