बारात निकालने पर गांव ने किया दलितों का बहिष्कार

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गांव में रहने वाले दलित परिवार मनुभाई परमार के बेटे मेहुल की शादी थी. शादी में दूल्हे की बारात भी निकाली गई. लेकिन मामला यहीं थोड़ा अटक गया. गांव से जब नाचते-गाते बारात निकाली गई तो उच्च जाति वालों को ये बात रास नहीं आई और रात में ही एक मीटिंग बुलाई गई.

गुजरात में दलितों को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां शादी के लिए दलित की बारात निकालने पर गांव के लोगों ने एक साथ सभी दलित परिवारों का बहिष्कार कर दिया है.
मामला मेहसाणा के कडी में ल्होर गांव का है. जहां गांव में रहने वाले दलित परिवार मनुभाई परमार के बेटे मेहुल की शादी थी. शादी में दूल्हे की बारात भी निकाली गई. लेकिन मामला यहीं थोड़ा अटक गया. गांव से जब नाचते-गाते बारात निकाली गई तो उच्च जाति वालों को ये बात रास नहीं आई और रात में ही एक मीटिंग बुलाई गई. इस मीटिंग में दलितों के खिलाफ कुछ अहम फैसले लिए गए. जिसमें गांव से दलितों के बहिष्कार किए जाने का फैसला किया गया. जिसके बाद अगले ही दिन सुबह किसी भी दलित को गांव से पानी, दूध, सब्जी जैसी एक भी चीज नहीं दी गई.
इतना ही नहीं, सरपंच के साथ मिलकर गांव वालों ने ये भी फैसला कर दिया कि अगर कोई भी शख्स किसी भी दलित के साथ अच्छे से बर्ताव करेगा तो उसे 5000 का जुर्माना चुकाना पड़ेगा. हालांकि दलितों का बहिष्कार किए जाने के बाद मनुभाई परमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने भी मामले में गंभीरता दिखाते हुए तुरंत कार्रवाई की. पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए सरपंच समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया है. वहीं सरपंच का बेटा अभी फरार है, जिसे पकड़ने के लिए कोशिश जारी है.

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