Happy Fathers Day: पापा जरुर बताइए इन फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के बारे में

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फादर्स डे के मौके पर अपने पिताजी को बताने की कोशिश करें कि आजकल निवेश का तरीका किस तरह बदल गया है और बाजार में मौजूद किस तरह का प्रोडक्ट उनके पोर्टफोलियो के लिए सही होगा और आने वाले साल में उनके लिए फायदेमंद साबित होगा.

अपनी जिंदगी का पहला फाइनेंशियल सबक हम अपने माता-पिता से ही सीखते हैं. ख़ास तौर पर हमारे पिता ही हमें अपने पर्सनल फाइनेंस के बारे में बताते हैं और ऐसा भी हो सकता है कि हमारा पहला बैंक अकाउंट उन्होंने ही खोला हो या अपना पहला इंश्योरेंस हमने उनकी मदद से ही ख़रीदा हो.
ELSS
इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स (ELSS) को अक्सर वरिष्ठ नागरिकों, रिटायर्ड या रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके लोगों के लिए सही निवेश विकल्प नहीं माना जाता है। जबकि इक्विटी, परिवर्तनशील हो सकता है, लेकिन फिर भी यदि कोई व्यक्ति, तीन से पांच साल के लिए इसमें निवेश करता है तो इक्विटी में किए गए निवेश पर मध्यम जोखिम के साथ अधिक रिटर्न मिलता है. इसके अलावा महंगाई की दृष्टि से, बैंक FD और इसी तरह के अन्य डिपोजिट प्लान, जितना रिटर्न देते हैं वे महंगाई दर से शायद ही अधिक होते हैं.
टैक्स बचाने की दृष्टि से, ELSS, म्यूच्यूअल फंड्स का एकमात्र ऐसा ऑप्शन है जिस पर धारा 80C के अंतर्गत छूट मिलती है. एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रु. से अधिक लाभ पर 10 फीसदी LTCG टैक्स लगने के बावजूद यह इस तरह के अन्य कैपिटल एसेट्स जैसे डेब्ट या लिक्विड फंड्स पर लगने वाले टैक्स से काफी कम है. इसके अलावा, ELSS में सिर्फ तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है जो लिक्विडिटी की दृष्टि से टैक्स सेविंग FD, PPF जैसे अन्य लॉन्ग टर्म ऑप्शंस की तुलना में सबसे कम लॉक-इन पीरियड वाला निवेश विकल्प है.
लिक्विड फंड्स
हो सकता है कि आपके पिताजी हमेशा फिक्स्ड डिपोजिट में निवेश करते हों क्योंकि उन्हें यह एक सुरक्षित विकल्प लगता होगा. लेकिन इस बात को ध्यान में रखते हुए कि FD की दरों में बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ है और प्रमुख बैंक वर्तमान में लगभग 5.5% से 7.5% की दर से ब्याज दे रहे हैं, इनकी तुलना में लिक्विड या शॉर्ट टर्म डेब्ट म्यूच्यूअल फंड एक अच्छा वैकल्पिक विकल्प है. लिक्विड या शॉर्ट टर्म डेब्ट फंड्स
में पैसे रखने पर आपके पैसे सुरक्षित भी रहते हैं और उस पैसे पर फिक्स्ड डिपोजिट से बेहतर रिटर्न भी मिलता है.
इन पर कोई एग्जिट लोड भी नहीं लगता है, इसलिए आपको पूरी रकम वापस मिल जाती है. लेकिन आपकी इनकम टैक्स सीमा के आधार पर, इन फंडों से होने वाले पूंजीगत लाभ पर टैक्स लगता है.
अधिक से अधिक हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज
इंश्योरेंस आपके पोर्टफोलियो में जरूर शामिल रहना चाहिए लेकिन इसे सिर्फ एक टैक्स बचाने वाला साधन नहीं समझना चाहिए. इसका एकमात्र उद्देश्य किसी अप्रत्याशित परिस्थिति जैसे किसी मेडिकल इमरजेंसी या विकलांगता के दौरान आर्थिक सहायता प्रदान करना है. यदि आपने कोई हेल्थ इंश्योरेंस नहीं लिया है तो अचानक कोई स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या उत्पन्न हो जाने पर आपका सारा पैसा खर्च हो सकता है. लगातार तेजी से बढ़ते मेडिकल खर्च को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने इस बार केन्द्रीय बजट में वरिष्ठ नागरिकों के हेल्थ इंश्योरेंस पर दिए जाने वाले प्रीमियम पर थोड़ी और ज्यादा टैक्स छूट देने का प्रस्ताव रखा है.
धारा 80D के अंतर्गत, दिए जाने वाले प्रीमियम पर मिलने वाली छूट की सीमा, 30,000 रु. से बढ़ाकर 50,000 रु. कर दी गई है. धारा 80DDB के अंतर्गत, क्रिटिकल ईलनेस इंश्योरेंस के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम के लिए, छूट की सीमा बढ़ाकर 1 लाख रु. कर दी गई है. इस तरह की छूट का लाभ वे लोग भी उठा सकते हैं जो अपने निर्भरशील वरिष्ठ माता-पिता के इलाज का खर्च उठा रहे हैं या उनके लिए हेल्थ
इंश्योरेंस का प्रीमियम दे रहे हैं.
ट्रेवल इंश्योरेंस
अपने माता-पिता को उनका मनचाहा हॉलिडे पैकेज गिफ्ट करने का यही सही समय है. और ऐसा भी हो सकता है कि वे एक से अधिक हॉलिडे पर जाना चाहते हों क्योंकि अब वे देश और दुनिया की यात्रा में अपना समय बिताना चाहते होंगे. लेकिन यात्रा सम्बन्धी परेशानियां जैसे लेट फ्लाईट, इमरजेंसी मेडिकल खर्च, इत्यादि उनके वैकेशन के लिए एक बहुत बड़ा बाधक बन सकती हैं. अपने पिताजी को इस तरह की
परिस्थिति से निपटने के लिए आर्थिक रूप से तैयार रहने में मदद करने के लिए उन्हें ट्रेवल इंश्योरेंस के बारे में बताएं.
यदि वे एक से अधिक ट्रिप पर जाना चाहते हैं तो उनके लिए एक मल्टी ट्रेवल इंश्योरेंस लेने की कोशिश करें जो उनके साल भर के सारे ट्रिप्स को कवर कर सके.
टैक्स फ्री बॉन्ड्स
टैक्स फ्री बॉन्ड्स, फ़िलहाल मुख्य बाजार में उपलब्ध न होने के बावजूद, आपके पिताजी के पोर्टफोलियो में दिखाई दे सकता है यदि वे लम्बे समय के लिए इसमें कुछ पैसे निवेश करके रखना चाहते हैं. सरकार समर्थित संगठनों द्वारा जारी किए जाने वाले इन बॉन्ड्स को स्टॉक एक्सचेंज पर बेचा या ख़रीदा जाता है क्योंकि वे लिस्टेड सिक्योरिटीज होते हैं. बस एक बात याद रखें कि इनका इस्तेमाल किसी FD की तरह न
करें क्योंकि इनका जेस्टेशन पीरियड थोड़ा लम्बा होता है जैसे 10 या 20 साल. इसलिए आपको इसमें थोड़ा पहले निवेश करने की योजना बनानी चाहिए, जैसे रिटायर होने से पांच या दस साल पहले, ताकि उनकी अवधि समाप्त होने तक आपको काफी लम्बे समय तक इंतजार न करना पड़े.
इस तरह के निवेशों पर कोई टैक्स छूट न मिलने के बावजूद, इससे सबसे बड़ा फायदा यही है कि इस पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स नहीं लगता है. लेकिन, यदि इन्हें एक्सचेंज पर ट्रांसफर करने पर कोई पूंजीगत लाभ होता है तो उस पर टैक्स जरूर लगेगा.

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